जब हम सिंहासन पर बैठते हैं तो राजा कहलाते हैं,
जब हम घोड़े पर सवार होते हैं तो योद्धा कहलाते हैं,
जब हम किसी की जान बचाते हैं तो क्षत्रिय कहलाते हैं,
जब हम किसी को वचन देते हैं तो "राजपूत" कहलाते हैं।
हमारी शक्सियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे गालिब,
हम तो कब्रिस्तान से भी गुज़रते हैं तो मुर्दे उठ कर कहते हैं...
"जय माताजी जी BAPU"
जब हम घोड़े पर सवार होते हैं तो योद्धा कहलाते हैं,
जब हम किसी की जान बचाते हैं तो क्षत्रिय कहलाते हैं,
जब हम किसी को वचन देते हैं तो "राजपूत" कहलाते हैं।
हमारी शक्सियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे गालिब,
हम तो कब्रिस्तान से भी गुज़रते हैं तो मुर्दे उठ कर कहते हैं...
"जय माताजी जी BAPU"
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