Thursday, 26 November 2015

राजपुत अपनी सियासत खुद लेकर चलते है

ना हम केसरीया रंग छोड सकते हॆ,
न जीने का ढंग छोड सकतेहॆ,

अरे फितरत से सिरफिरे हॆ हम,

न हॊसला-ए-दबंग छोड़ सकते हॆ,
न ही राजपुताना छोड़ सकते है ।।।

ताजमहल अगर प्यार की निशानी है तो,
याद रखना हल्दी घाटी तुम्हारे बाप की कहानी है !!

ताज कि फिकर तो बादशाहों को होती हे,
हम तो RAJPUT हे,
RAJPUT अपनी सियासत खुद लेकर चलते ह ||

"Rajput Ekta"
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